मराठा कालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब, सावन के पहले सोमवार को किया जलाभिषेक

Performed Jalabhishek on the first Monday of Sawan

सहारनपुर : पवित्र सावन माह के पहले सोमवार को शिवमंदिरों में शिवभक्तों का तांता लगा हुआ है। ऐसा ही नजारा सहारनपुर के मराठा कालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में देखने को मिला जहां बड़ी संख्या में पहुंचे शिवभक्तों ने अपने आराध्य नाथो के नाथ भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 500 साल पहले मराठा शासक ने बनवाया था और इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से लगातार 40 दिन तक इस मंदिर में जलाभिषेक करने पर हर मनोकामना पूरी हो जाती है। यही वजह है कि मराठाकालीन इस मंदिर में दूर दूर से शिवभक्त दर्शन करने पहुँचते हैं। कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब से बचने के लिए मंदिर में एक गुप्त शिखर बनवाया गया था।

Performed Jalabhishek on the first Monday of Sawan

आपको बता दें कि जिले में सैकड़ों शिव मंदिर हैं, लेकिन बाबा भूतेश्वर महादेव मंदिर की एक अलग ही पहचान है। इस मंदिर में हजारों सालों से प्राकृतिक शिवलिंग विद्यमान है। इस मंदिर का निर्माण मराठा शासकों ने करवाया था। उस समय मराठा शासकों ने एक नहीं, बल्कि चार शिव मंदिरों की स्थापना की थी। भूतेश्वर महादेव मंदिर उनमें से एक है। भूतेश्वर महादेव मंदिर में शिवभक्तों का तांता लगा रहता है। कहा जाता है कि जब मराठा शासकों ने सहारनपुर में अपना साम्राज्य स्थापित किया, तब मराठा शासक नाथों के नाथ भोलेनाथ के भक्त थे। जिसके चलते मराठा शासकों ने सहारनपुर में भूतेश्वर महादेव, पातालेश्वर महादेव, बागेश्वर महादेव, पाठेश्वर महादेव नामक चार शिव मंदिरों का निर्माण कराया था। जिनमें से भूतेश्वर महादेव मंदिर को प्रमुख मंदिर माना जाता है। यहाँ न केवल सोमवार को बल्कि हर दिन भक्तों का जमावड़ा लगता है। शिवभक्त अपने आराध्य देव महादेव के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएँ मांगते हैं।

Performed Jalabhishek on the first Monday of Sawan

मराठा शासकों द्वारा निर्मित भूतेश्वर महादेव मंदिर में जो भी भक्त लगातार 40 दिनों तक दर्शन करते हैं, उनके सभी बिगड़े काम और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। वैसे तो यहाँ हर दिन भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन सावन के महीने में शिव भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। कहा जाता है कि मराठा शासकों ने अपने द्वारा बनवाए गए सभी शिव मंदिरों में बेलपत्र के पेड़ लगवाए थे, ताकि शिव भक्त जलाभिषेक करते समय आसानी से बेलपत्र ला सकें। बाबा भूतेश्वर महादेव मंदिर में हर साल कांवड़ियों के साथ-साथ भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। मंदिर की भव्यता भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

इस मंदिर में प्रतिदिन दूर-दूर से हजारों भक्त दर्शन करने आते हैं। शिव मंदिर की भव्यता देखकर हर कोई बाबा के दर्शन करने आता है। मंदिर में शिवलिंग पर स्थापित छत्र को मराठा काल की धरोहर बताया जाता है। मंदिर में बनी छत्रियां भी मराठा शासन की कहानी बयां करती हैं। कहा जाता है कि ये छत्रियां संतों की इच्छा समाधि पर बनी हैं। मंदिर परिसर में 20 संतों की समाधियां हैं, जहां अलग-अलग समय पर ऋषि-मुनियों ने समाधि ली थी। इन समाधियों के दर्शन मात्र से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया NPR BHARAT NEWS के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...

Related posts